मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम अब नजदीक हैं। दोनों ही दलों को अपने विजय होने की उम्मीद बनी हुई है लेकिन भाजपा इस बार पूरी तरह से प्रदेश की लाडली बहनों पर आश्रीत नजर आ रही है , जबकि कांग्रेस ने OPS के साथ साथ भाजपा के 18 साल के घोटालो को भुनाने का प्रयास किया | बावजूद इन सब के यहां भाजपा अपनी मास्टर स्ट्रोक योजना लाड़ली बहना को लेकर उत्साहित है, वहीं कांग्रेस को नारी सम्मान योजना से उम्मीदें बंधी हुई हैं। इस चुनाव में हुई महिलाओं की बम्पर वोटिंग ने इन उम्मीदों को और अधिक बढ़ा दिया है।

मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के लिए 17 नवंबर को मतदान हुआ था। विधानसभा चुनावों के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए इस बार 77.15 प्रतिशत वोटिंग हुई है। इससे पहले 2018 में 74.97 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इस बार सिवनी में सबसे अधिक 86.29 प्रतिशत वोटिंग हुई है। वहीं, छिंदवाड़ा में 85.85 प्रतिशत, बालाघाट में 85.35 प्रतिशत, आगर मालवा में 85.09 प्रतिशत और शाजापुर में 85.01 प्रतिशत उज्जैन में 75 प्रतिशत मतदान हुआ है। वही इस बार पुरुष और महिला दोनों की ही हिस्सेदारी प्रतिशत बढ़ी है। इस बार 78 प्रतिशत पुरुषों ने और 76 फीसदी महिलाओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। भले ही अंतर दो प्रतिशत का दिख रहा हो, लेकिन 20 साल में 14 प्रतिशत अधिक महिलाएं वोट डालने मतदान केंद्रों तक पहुंची हैं।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए एग्जिट पोल्स के प्रकाशन 30 नवंबर की शाम छह बजे से शुरू हो गए आधे न्यूज़ चेनल ने कांग्रेस की सरकार मध्यप्रदेश राजस्थान छतीसगढ़ में बनाई तो आधे चेनलो ने भाजपा को सत्ता में आता दिखाया है |
मध्यप्रदेश को लेकर एग्जिट पोल ने भी संसय पैदा कर दिया है एग्जिट पोल को लेकर कांग्रेस भाजपा के नेता आपस में खुस जरुर हो रहे है लेकिन सरकार का रास्ता 03 दिसंबर को आने वाले परिणाम के बाद ही तय होगा |
