नई दिल्ली || नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की है कि अगले शैक्षणिक सत्र से नीट-यूजी परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित (Computer-Based Test – CBT) यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी।
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोहों (माफिया) पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए पारंपरिक पेन-एंड-पेपर (OMR) फॉर्मेट को हमेशा के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के 4 बड़े ऐलान
- अगले साल से पूरी तरह ऑनलाइन टेस्ट: शिक्षा मंत्री ने दो टूक कहा, “ओएमआर शीट आधारित टेस्ट की तुलना में कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होते हैं, इसलिए अगले साल से नीट परीक्षा ऑनलाइन होगी.”
- 21 जून को होगी स्थगित हुई नीट परीक्षा: बीते 3 मई को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक (गेस पेपर लीक) की पुष्टि होने के बाद रद्द कर दिया गया था। अब यह री-एग्जाम (Re-NEET) 21 जून को आयोजित किया जाएगा।
- छात्रों को बड़ी राहत, कोई एक्स्ट्रा फीस नहीं: 21 जून को होने वाले री-एग्जाम के लिए छात्रों को दोबारा कोई रजिस्ट्रेशन नहीं करना होगा और न ही कोई अतिरिक्त फीस देनी होगी। पुराने सेंटर और डेटा ही मान्य रहेंगे।
- CBI करेगी मामले की जांच: पेपर लीक मामले की पूरी कड़ाई से जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। दोषियों को पाताल से भी ढूंढ निकालने का आश्वासन दिया गया है।
क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
जांच एजेंसियों के इनपुट के मुताबिक, 3 मई की परीक्षा से पहले व्हाट्सएप और अन्य माध्यमों पर एक तथाकथित ‘गेस पेपर’ सर्कुलेट हुआ था। फॉरेंसिक जांच में यह सामने आया कि इस गेस पेपर के करीब 120 केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्न मूल परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खा रहे थे। देश के 22 लाख से अधिक ईमानदार छात्रों के भविष्य और योग्यता (Meritocracy) की रक्षा के लिए सरकार ने पुरानी परीक्षा रद्द कर नए नियमों को लागू करने का फैसला किया है।
राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें होंगी लागू
इस परीक्षा गड़बड़ी के बाद पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ पैनल ने व्यवस्था सुधार के लिए कई अहम सुझाव दिए थे। भविष्य की ऑनलाइन परीक्षाओं में इन नियमों को शामिल किया जाएगा:
- AI आधारित वेरिफिकेशन: छात्रों का बायोमेट्रिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चेहरा मिलान।
- डिजिटल ट्रांसमिशन: प्रश्नपत्रों को लीक से बचाने के लिए उन्हें पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड डिजिटल फॉर्मेट में सीधे सेंटर पर भेजा जाएगा।
- सीसीटीवी सर्विलांस: परीक्षा केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी मॉनिटरिंग को बेहद कड़ा किया जाएगा।
