चेन्नई में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए शिक्षा व्यवस्था, NEET परीक्षा, शैक्षणिक संस्थानों के लिए फंड, भाषा और परिसीमन जैसे मुद्दों को उठाया। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तमिलनाडु के हितों की अनदेखी करने और राज्य की भाषा, संस्कृति तथा पहचान को प्रभावित करने का आरोप लगाया।
NEET, शिक्षा फंड और परिसीमन पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने NEET परीक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था से तमिलनाडु के विद्यार्थियों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने शिक्षा के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि राज्य के लिए करीब 3,300 करोड़ रुपये का फंड रोका गया है। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप राहुल गांधी के दावों पर आधारित हैं।
परिसीमन के मुद्दे पर राहुल गांधी ने आशंका जताई कि इससे संसद में तमिलनाडु का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को अपने भविष्य और प्रतिनिधित्व से जुड़े फैसलों में अपनी आवाज उठाने का अधिकार है।
भाषा और संस्कृति की रक्षा पर जोर
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने तमिल भाषा, संस्कृति और इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी राज्य की पहचान और उसकी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने पेरियार के विचारों का जिक्र करते हुए विद्यार्थियों को स्वतंत्र सोच विकसित करने और सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया।
दिल्ली में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर भी बोले राहुल
चेन्नई में छात्रों से संवाद के दौरान राहुल गांधी ने दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की गई और प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने विद्यार्थियों के साथ मारपीट की। राहुल गांधी ने भाजपा से जुड़े लोगों पर भी छात्रों को पीटने का आरोप लगाया। ये आरोप उनके भाषण का हिस्सा थे।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने अधिकारों, शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहें तथा बिना डर अपनी बात रखें।
चेन्नई के आइलैंड ग्राउंड्स में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस ने विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद किया। शिक्षा, रोजगार, भाषा, लोकतांत्रिक अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे इस संवाद के केंद्र में रहे।

