HEADLINE –
- उज्जैन में इंदौर के भागीरथपुरा जैसा खतरा!
- वार्ड 19 में सालों से गंदा-बदबूदार पानी
- रहवासियों ने अधिकारियों को दिखाया काला पानी
उज्जैन। मध्यप्रदेश में इंदौर के भागीरथपुरा कांड के बाद अब उज्जैन में भी कई वार्डों में दूषित बदबूदार पानी नलों से आने का मामला सामने आया है। ताजा मामला वार्ड क्रमांक 19 के निजातपुरा क्षेत्र का है, जहां रहवासियों की शिकायत के बाद पार्षद ने निगम के अधिकारियों को भागीरथपुरा की घटना से अवगत करवाते हुए मामले को गंभीरता से लेने के लिए सचेत किया है।
एमपी के इंदौर की घटना से हर कोई वाकिफ है, जहां भागीरथपुरा में दूषित पानी से 36 लोगों की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है। जांच रिपोर्ट में 22 मौतों को सीधे दूषित पानी से जोड़कर अधिकारियों की 2018 से चली आ रही लापरवाही और 859 दिन की टेंडर देरी को जिम्मेदार ठहराया गया है। वहीं उज्जैन में भी अधिकारी उसी राह पर चलते नजर आ रहे हैं।
शहर के *वार्ड क्रमांक 19, निजातपुरा ईमली गली और लक्ष्मी अपार्टमेंट के पास* स्थित अड्डे में सालों से गंदे, बदबूदार और कम प्रेशर वाले पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों के बाद मामला तूल पकड़ गया।
आज कांग्रेस नेता डॉ. जितेन्द्र परमार*और पार्षद प्रतिनिधि मोहित जायसवाल ने अपर आयुक्त पवन सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी अपर आयुक्त डी.सी. गुप्ता, अपर आयुक्त योगेन्द्र पटेल और PHE अधिकारी शिवम दुबे को मौके पर बुलाकर निरीक्षण करवाया।

रहवासियों ने बाल्टी में भरकर दिखाया काला पानी
निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर नजारा तब देखने को मिला जब रहवासियों ने नल से आ रहे *काले, बदबूदार पानी को बाल्टी और बोतलों में भरकर अधिकारियों के सामने रख दिया।* पानी में बदबू इतनी तेज थी कि अधिकारियों को भी मुंह फेरना पड़ा। रहवासियों ने बताया कि वर्षों से यही पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे बच्चे और बुजुर्ग लगातार बीमार हो रहे हैं।
अधिकारियों ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों को समस्या का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ खानापूर्ति है?
इंदौर से सबक नहीं लिया?
भागीरथपुरा में भी शुरुआत में लोग काले, बदबूदार पानी की शिकायत करते रहे, पार्षद चिल्लाते रहे और अधिकारी फाइलों में उलझे रहे। नतीजा 36 मौतें। हाईकोर्ट की रिपोर्ट कहती है – अगर समय पर पाइपलाइन बदली जाती तो त्रासदी टल जाती।
उज्जैन के वार्ड 19 में भी स्थिति हूबहू वैसी ही है। PHE और निगम सिर्फ आश्वासन दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द पाइपलाइन नहीं बदली गई तो यहां भी बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है।

