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चिनाब ब्रिज को लेकर इंजिनियर माधवी का पोस्ट : मुझे बधाई और श्रेय ना दे

नई दिल्ली ||  हाल ही में जम्मू में प्रधानमंत्री के द्वारा लोकार्पित किये गए चिनाब ब्रिज को लेकर इंजिनियर  की पोस्ट वायरल हो रही है ,  दुनिया के सबसे लंबे चिनाब रेल ब्रिज के निर्माण को लेकर सोशल मीडिया पर इंजीनियर डॉक्टर माधवी लता को लोग बधाई दे रहे हैं। अब इसको लेकर उन्होंने एक लिंक्डइन पोस्ट शेयर किया है।

इसमें उन्होंने कहा कि चिनाब ब्रिज के निर्माण का श्रेय मुझे न दें। इसकी प्लानिंग, डिजाइन और निर्माण का सारा श्रेय भारतीय रेलवे और AFCONS को जाता है। इसमें मेरा रोल जिओ टेक्निकल के तौर पर रहा है, जिसका काम ढलान पर नींव के डिजाइन पर काम करना था। माधवी लता ने कहा;-

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मुझे बेवजह मशहूर न बनाया जाए, क्योंकि यह एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। मिशन के पीछे महिला, असंभव को संभव बनाया और पुल बनाने के लिए चमत्कार किया जैसे सभी मीडिया कथन निराधार हैं।

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दरअसल, दरअसल, बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा समेत हजारों लोगों ने माधवी लता को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर तारीफ की थी। लोग उन्हें ब्रिज के प्रोजेक्ट पर 17 साल देने के लिए लोग बधाई दे रहे थे।

6 जून को पीएम मोदी ने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज चिनाब ब्रिज का उद्घाटन किया था। यह नदी तल से 359 मीटर की ऊंचाई पर बना 1,315 मीटर लंबा पुल है।

 

जी माधवी लता कौन हैं?

माधवी लता वर्तमान में IISc में HAG प्रोफेसर हैं। उन्होंने 1992 में जवाहरलाल नेहरू प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक की पढ़ाई पूरी की, जहाँ उन्होंने डिस्टिंक्शन के साथ प्रथम श्रेणी हासिल की।

इसके बाद उन्होंने जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता के साथ वारंगल के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में एम.टेक छात्र के रूप में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा, लता ने 2000 में IIT-मद्रास से जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

उन्हें पिछले कुछ वर्षों में कई पुरस्कार मिले हैं, जिसमें 2021 में भारतीय भू-तकनीकी सोसायटी द्वारा सर्वश्रेष्ठ महिला भू-तकनीकी शोधकर्ता का पुरस्कार भी शामिल है। उन्हें 2022 में भारत की STEAM में शीर्ष 75 महिलाओं में भी नामित किया गया था।

 

चेनाब ब्रिज परियोजना में भूमिका

यह पुल प्रतिकूल स्थलाकृति, मौसम की स्थिति और दूरस्थ स्थान के कारण एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण परियोजना है।लता की टीम ने बाधाओं को दूर करने के लिए “डिजाइन-एज़-यू-गो दृष्टिकोण” अपनाया। उन्होंने टूटी हुई चट्टानों, छिपी हुई गुहाओं और अलग-अलग रॉक गुणों जैसी भूवैज्ञानिक स्थितियों के आधार पर वास्तविक समय में नवाचार किया, जो शुरुआती सर्वेक्षणों में स्पष्ट नहीं थे।

टीम ने निर्माण के दौरान पाई गई वास्तविक चट्टान द्रव्यमान स्थितियों के अनुसार काम करने के लिए जटिल गणनाएँ और डिज़ाइन संशोधन किए। लता के योगदान में स्थिरता में सुधार के लिए रॉक एंकर के डिज़ाइन और प्लेसमेंट पर सलाह शामिल थी। उन्होंने हाल ही में इंडियन जियोटेक्निकल जर्नल के महिला विशेष अंक में “डिज़ाइन ऐज़ यू गो: द केस स्टडी ऑफ़ चिनाब रेलवे ब्रिज” शीर्षक से एक पेपर प्रकाशित किया है।

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