HEADLINE
- दिल्ली आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
- मेट्रो और इंटरनेट सेवा बहाल करने के निर्देश
- 23 घंटे बाद दीपके, सौरव और आशुतोष रिहा
नई दिल्ली | 11 अक्टूबर 2026 | जनसंवाद एक्सप्रेस डिजिटल
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन और आम नागरिकों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली में मेट्रो सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने और इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को करीब 23 से 24 घंटे हिरासत में रहने के बाद रिहा कर दिया गया। रिहाई के लिए उन्हें एक साल तक शांति भंग नहीं करने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपये का बांड भरना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों को लेकर क्या कहा?
10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह रोकने पर सवाल उठाए और अधिकारियों से कहा कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए मेट्रो सेवाओं का संचालन सामान्य किया जाए। अदालत ने इंटरनेट सेवाओं पर लगी पाबंदियां हटाने के लिए भी निर्देश दिए।
सुनवाई में आम जनता को होने वाली परेशानी, वकीलों की आवाजाही और नागरिकों की स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठा। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई का जवाब मांगा। मेट्रो सेवाओं को लेकर अदालत का स्पष्ट रुख था कि सुरक्षा के नाम पर आम लोगों की दैनिक आवाजाही को अनावश्यक रूप से बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
23 घंटे बाद तीनों नेता रिहा, एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और नेताओं सौरव दास तथा आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को विमान के दिल्ली पहुंचने के बा
द हिरासत में लिया था। उन्हें 11 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। इसके बाद 50 हजार रुपये के जमानतदार बांड पर रिहाई का आदेश दिया गया। तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त का पालन करना होगा |
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया गया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें शनिवार देर रात रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई के साथ आगे के विरोध प्रदर्शनों में भाग नहीं लेने की शर्त जुड़ी होने की जानकारी सामने आई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन
प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। आंदोलनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
विपक्ष और प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चिंता जताई है। वहीं, निर्वाचन आयोग ने पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है। भारतीय जनता पार्टी ने भी चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं चालू
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली के मध्य क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया, जबकि मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को लेकर भी प्रतिबंध लगाए गए थे। रॉयटर्स के अनुसार, रविवार को मेट्रो स्टेशन फिर खुल गए और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी बहाल थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो को सामान्य समय-सारणी के अनुसार चलाने के निर्देश दिए और केंद्र सरकार से मंगलवार तक जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने मामले से जुड़े वकीलों को सुनवाई का अवसर देने की बात भी कही।
11 अक्टूबर को आंदोलन के दूसरे दिन भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की संभावना के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। रिहा हुए नेताओं की ओर से दोपहर 2 ब
जे प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसमें आंदोलन की आगे की रणनीति और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर रुख स्पष्ट किए जाने की उम्मीद थी।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में तीन प्रमुख सवाल हैं: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सार्वजनिक सेवाओं पर लगी पाबंदियों की स्थिति क्या रहती है, आंदोलनकारी आगे क्या रणनीति अपनाते हैं और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर निर्वाचन आयोग तथा केंद्र सरकार का अगला कदम क्या होगा।


