- मुख्यमंत्री के शहर में ‘खुद ही मंत्री बन गए’ विधायक जी, बोले – अब मंत्री बोलने की आदत डाल लो
- मंत्री बनने की बेचैनी: उज्जैन में BJP विधायक का फरमान – मुझे मंत्री कहो
- 25 साल विधायक रहने का दावा करने वाले अब मंत्री बनने को बेताब
उज्जैन। भाजपा में इन दिनों पद नहीं, पद की भूख की चर्चा ज्यादा है। ताजा मामला मुख्यमंत्री के गृह नगर उज्जैन का है, जहां के एक भाजपा विधायक इन दिनों खुद को मंत्री समझने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि कलमकारों के बीच पहुंचे विधायक जी ने फरमान सुनाया – *”अब मुझे मंत्री बोलने की आदत डाल लो।”*
सुनकर पत्रकार भी मुस्कुरा दिए। क्योंकि ये वही विधायक हैं जिनकी जुबान समय के साथ पद के हिसाब से बदलती रही है।
जब पार्टी में पदाधिकारी थे, तब कार्यकर्ताओं से कहते थे – *मुझे विधायक बोला करो।*
फिर जब किस्मत से विधायक बन गए, तो अहंकार में बोले – *25 साल मैं ही विधायक रहूंगा।*
और अब… अब सीधे मंत्री
विधायक जी भूल गए कि विधायक जनता बनाती है, और मंत्री मुख्यमंत्री बनाते हैं। और मुख्यमंत्री का गृह नगर उज्जैन है, दिल्ली नहीं। यहां हर गली में दावेदार घूम रहा है, पर मंत्री की कुर्सी सपने से नहीं, परफॉर्मेंस से मिलती है।
क्षेत्र में विकास के नाम पर फीता काटने के अलावा उपलब्धि क्या है, इसका जवाब विधायक जी के पास नहीं है, लेकिन मंत्री का टैग चाहिए।
भाजपा संगठन में इस तरह की बयानबाजी को हल्के में नहीं लिया जा रहा। एक तरफ पार्टी अनुशासन और संगठन सर्वोपरि की बात करती है, दूसरी तरफ एक विधायक खुद ही खुद को मंत्री घोषित कर बाजार में घूम रहे हैं।
इससे साफ है, इन्हें जनता की सेवा से ज्यादा कुर्सी की लालसा है।
अब देखना यह है कि इस तरह खुद को मंत्री बुलवाने की आदत डालने वाले विधायक को, भाजपा हाईकमान मंत्री बनने की आदत डलवाता है या घर बैठने की।
मजे की बात ये है कि मुख्यमंत्री का शहर उज्जैन है। यहां मंत्री बनने की लाइन में एक नहीं, आधा दर्जन दावेदार रोज भोपाल-दिल्ली की परिक्रमा कर रहे हैं। मंत्री जनता नहीं, मुख्यमंत्री बनाता है और परफॉर्मेंस देखकर बनाता है।विधानसभा में सवाल कितने उठाए, क्षेत्र में कितने काम लाए, इसका हिसाब तो शून्य है, लेकिन फीता काटकर फोटो खिंचवाने में सबसे आगे हैं।
ऐसे में खुद को मंत्री घोषित कर घूमना पार्टी के अनुशासन पर भी सवाल खड़ा करता है।भाजपा में जो पार्टी से बड़ा बनने की कोशिश करता है, उसका हश्र क्या होता है, ये विधायक जी भी जानते हैं। अब देखना है कि हाईकमान इन्हें मंत्री की कुर्सी की आदत डलवाता है या घर बैठने की।

